Birthday Special: 51वें जन्मदिन पर सनथ जयसूर्या की पांच शानदार पारियों पर एक नजर

By | 30/06/2020

अपने बल्ले से अच्छे-अच्छे गेंदबाजों के छक्के छुड़ाने वाले वाले सनथ जयसूर्या (Sanath Jayasuriya) ने अपने बल्ले से वे कमाल किए जो उस समय सोचे भी नहीं जा सकते थे। जयसूर्या का नाम ही आक्रामक बल्लेबाजी का पर्याय बन गया था। श्रीलंका के इस बल्लेबाज ने लिमिटेड ओवर क्रिकेट की दशा और दिशा दोनों बदल कर रख दी। महज 48 गेंद पर शतक हो या फिर 17 गेंद पर हाफ सेंचुरी लगाने वाले जयसूर्या (Sanath Jayasuriya) आज अपना 51वां जन्मदिन मना रहे हैं।

51 साल के हुए जयसूर्या….

सनथ जयसूर्या (Sanath Jayasuriya) क्रिकेट के मैदान पर जितने भी सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर्स उतरे उनमें से एक हैं। आज जयसूर्या अपना 51वां जन्मदिन मना रहे हैं। आज ही के दिन साल 1969 को श्रीलंका के इस महान खिलाड़ी का जन्म हुआ था। गेंदबाज के रूप में शुरुआत करने के बाद तब के श्रीलंकाई कोच डेव वॉटमोर (Dav Whatmore) और कप्तान अर्जुन राणातुंगा (Arjuna Ranatunga) ने जयसूर्या को सलामी बल्लेबाज बनाया। और फिर इसके बाद रमेश कालूविताराना के साथ मिलकर उन्होंने एक ऐसी सलामी जोड़ी बनाई जो दुनियाभर के गेंदबाजों के लिए खौफ बन गई।

आक्रामक बल्लेबाजी का पर्याय बन गए जयसूर्या…..

सनथ जयसूूर्या (Sanath Jayasuriya) के नाम से श्रीलंका को ऐसा बल्लेबाज मिला जिसने श्रीलंकाई टीम का इतिहास बदलकर रख दिया। अपना आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाए जाने यह बल्लेबाज एक अच्छे गेंदबाज भी थे।जयसूर्या एक ऐसे स्पिनर थे जो कठिन समय में अपनी टीम के लिए मैच बदल देते थे। 1996 में श्रीलंका ने वर्ल्ड कप अपने नाम किया था और इसमें भी जयसूर्या ने ही प्रमुख भूमिका निभाई थी। गेंद शॉर्ट हो या फुल, जयसूर्या का हमला पूरा रहता था। बेशक, वह ऐसे बल्लेबाज रहे जिन्होंने वनडे क्रिकेट को बदलकर रख दिया।

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सनथ जयसूर्या (Sanath Jayasuriya) के रनों और पारियों को याद करना आसान नहीं है उन्होंने हर मैच में अपना सौ प्रतिशत दिया है। इस खास मौके पर हम उनके उन कुछ खास पारियों के बारे में बात करेंगेे जिसने इतिहास रच दिया।

कोलम्बो में 340 की पारी…

1907 के दौरे पर पहले टेस्ट मैच में तब इतिहास रचा गया जब श्रीलंका और भारत आमने सामने थे। उन्होंने भारत के खिलाफ कोलंबो में 1997-98 में 340 रनों की पारी खेली थी जो उस समय किसी श्रीलंकाई बल्लेबाज द्वारा बनाया गया सर्वाधिक स्कोर था। टॉस जीतकर भारत ने 8 विकेट गंवाकर 537 रनों का लक्ष्य रखा। जवाब में श्रीलंका के इस धुरंधर ने इतिहास रच दिया। जयसूर्या (Sanath Jayasuriya) ने मैराथन की तरह खेलते हुए शानदार ट्रिपल शतक लगाकर इतिहास रच दिया।
यह उच्चतम टेस्ट स्कोर भी था।

199 कोलंबो में (टेस्ट)….

जयसूर्या (Sanath Jayasuriya) ने अपने तिहरे शतक के बाद इस सीरीज के दूसरे गेम में एक और शानदार पारी खेली। पहली पारी में सिर्फ 32 रन पर आउट होने के बाद, बाएं हाथ का बल्लेबाज खेल की तीसरी पारी में अपने पुराने फॉर्म में वापस आए। सलामी बल्लेबाज ने शुरू से ही भारतीय गेंदबाजों पर ऐसा हमला किया कि प्रशंसक भूल गए कि यह एकदिवसीय मैच था। हालांकि, वह एक रन से अपने दोहरे शतक से चूक गए और अंततः खेल ड्रा हो गया।

शारजाह (वनडे) में 189….

शारजाह में कई मौकों पर तूफानी पारियों का अनुभव हुआ है। जयसूर्या (Sanath Jayasuriya) ने कोका-कोला चैंपियंस ट्रॉफी 2000 के फाइनल में भी शानदार प्रदर्शन किया। विध्वंसक सलामी बल्लेबाज ने पहली ही गेंद से अपने इरादे स्पष्ट कर दिए और जहीर खान और अजीत अगरकर पूरी तरह से असहाय दिखे। वह अपना शतक पूरा करने के बाद और भी अधिक आक्रामक हो गए और वह एकदिवसीय दोहरा शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज बनने के लिए पूरी तरह तैयार दिखे।

हालाँकि, भारतीय कप्तान सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने अपने गेंदबाजों को अपनी निगरानी में लिया और जयसूर्या 189 रन पर आउट हो गए। जीत के लिए 300 रनों का पीछा करते हुए, भारत को मात्र 54 रनों पर ढेर कर दिया गया और 245 रनों से श्रीलंका ने मैच जीत सिया।

मुंबई में 151 (वनडे)…..

पेप्सी इंडिपेंडेंस कप 1997 के चौथे मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए मेन इन ब्लू केवल 225/7 बना सका और ट्रैक गेंदबाजी के लिए ज्यादा सही था। हालाँकि, जब जयसूर्या (Sanath Jayasuriya) ने दूसरी पारी में मैदान संभाला, तो ऐसा कुछ भी नहीं लगा। उन्होंने भारतीय गेंदबाजों को ऐसा धुना कि गेंदबाजों की हालत खराब हो गई। पिच के दूसरे छोर पर लगातार विकेट गिरते रहे लेकिन एक विकेट पर जयसूर्या टीके हुए थे। उन्होंने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की और अपनी टीम को पाँच विकेट से जीत दिलाई।

1998 में 4/18 (ODI)…

भारत के खिलाफ एक बार फिर सनथ जयसूर्या 1998 निदाहस ट्रॉफी के 7 वें मैच के दौरान सामने आए। इस बार उन्होंने बल्ले से नहीं बल्कि हाथ में गेंद लेकर भारत के लिए मुश्किलें खड़ी की। बारिश से प्रभावित इस मैच में श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 विकेट पर 171 रन बनाए। मोहम्मद अज़हरुद्दीन इमका सामना करने के पक्षधर थे। हालाँकि जयसूर्या (Sanath Jayasuriya) के अलग विचार थे। बाएं हाथ के इस स्पिनर ने भारत के मध्य क्रम को धराशाही किया और चार महत्वपूर्ण विकेट लिए। उनके प्रयास फलदायी साबित हुए क्योंकि श्रीलंका ने इस खेल को आठ रनों से जीत लिया।

दो दशक से अधिक समय तक श्रीलंका के लिए खेलने के बाद जयसूर्या (Sanath Jayasuriya) ने जून 2011 में खेल से सन्यास ले लिया। हालांकि उन्होंने प्रशासन विभाग के माध्यम से श्रीलंकाई क्रिकेट की सेवा जारी रखी। 2013 में वास्तव में उन्हें 2013 में चयनकर्ताओं के द्वारा श्रीलंकाई क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था। हालांकि 2019 में इस महान क्रिकेटर को आईसीसी द्वारा भ्रष्टाचार विरोधी संहिता के तहत दो साल का प्रतिबंध झेलना पड़ा।

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