कपिल देव को इस भारतीय खिलाड़ी से लगता था डर

By | 16/07/2020

बिशन सिंह बेदी (Bishan Singh Bedi) की कप्तानी में इंटरनेशन क्रिकेट में डेब्यू करने वाले कपिल देव (Kapil Dev) भारत को वो दिया जिसके लिए यह देश कई साल से उम्मीदें लगाए बैठा था। जी हां भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव (Kapil Dev) ने भारत को वर्ल्ड कप दिया। वो वर्ल्ड कप जिसपर सिर्फ विदेशी टीमों का हक हुआ करता था उसके लिए कपिल देव ने अपनी टीम तैयार की और अंत में कप को अपने देश में लेकर आए।

जिस कपिल देव ने विदेशी खिलाड़ियों को धोया वो अपने ही टीम के एक खिलाड़ी से डरता था। जी हां कपिल देव ने उस भारतीय खिलाड़ी के बारे में खुलासा किया है जिनसे उन्हें सबसे ज्यादा डर लगता था और वो हैं श्रीनिवास वेंकटराघवन (Srinivasaraghavan Venkataraghavan)।

श्रीनिवास वेंकटराघवन से लगता था डर….

इतने सालों बाद कपिल देव (Kapil Dev) ने खुलासा किया कि उन्हें विदेशी नहीं बल्कि एक भारतीय खिलाड़ी से ही डर लगता था। कोच डब्ल्यूवी रमन के साथ हाल ही में एक इंटरव्यू में, 1983 के विश्व कप विजेता कप्तान कपिल देव ने ये खुलासा किया कि वे जब भी वेंकटराघवन (Srinivasaraghavan Venkataraghavan) के आसपास होते थे उनसे छिपने के लिए जगह ढूंढते थे।

उन्होंने कहा “इंग्लैंड में, एक टेस्ट मैच के दौरान शाम के ब्रेक को चाय ब्रेक कहा जाता है। वेंकटराघवन हमेशा तर्क देते थे और कहते थे कि केवल चाय ही क्यों? यह चाय और कॉफी का ब्रेक होना चाहिए।”

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कपिल देव (Kapil Dev) ने डरने की बात का खुलासा करते हुए कहा “मैं वेंकटराघवन से बहुत डरता था। पहले वह केवल अंग्रेजी में बात करते थे और दूसरी बात यह कि हम सभी उनके गुस्से को जानते थे। जब वह अंपायर थे तब भी वह एक तरह से आउट नहीं देते थे, जैसे कि वह गेंदबाज को डांट रहे हों। जब मैं 1979 में इंग्लैंड गया, तो वह कप्तान थे, मैं एक ऐसी जगह खोजता था, जहाँ वह मुझे ढूंढ न पाएं क्योंकि वह काफी खुंखार थे।”

कोने में बैठकर नाश्ता करता था….

भारतीय टीम को पहली बार वर्ल्ड कप विजेता बनाने वाले कपिल देव (Kapil Dev) किसी से इतना डरते होंगे ये किसी ने सोचा भी नहीं था। उन्होंने कहा “हमारे पास बेदी, प्रसन्ना, चंद्रशेखर थे, इसलिए वह वास्तव में उनसे ज्यादा नहीं कह सकते थे। और स्वाभाविक रूप से जब भी वह मुझे देखते थे वह आग बबूला हो जाते थे।”

उन्होंने कहा “मैं तो इतना डरता था किएक कोने में बैठकर नाश्ता करता था क्योंकि मैं एक हैवी खाने वाले था। श्रीनिवास वेंकटराघवन जब भी मुझे देखते थे तो कहते थे कि ये हमेशा खाता ही रहता है इसलिए मैं कोने में छुप कर खाता था।”

आपको बता दें कि कपिल देव (Kapil Dev) देश के उन बेहतरीन ऑलराउंडरों में से एक, जिन्होंने अपने करियर के दौरान सुनील गावस्कर सहित कई कप्तानों के साथ खेला है। टीम की कप्तानी संभालने के बाद उन्होंने भारतीय टीम को एक शानदार खेल के लिए तैयार किया और अंत में कड़ी और खूंखार टीमों को चुनौती देते हुए वर्ल्ड कप अपने नाम किया था। पहली बार इतिहास रचने वाले इस कप्तान का स्वदेश में स्वागत खुद प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) ने की थी।

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