सौरव गांगुली ने कहा- “इन खिलाड़ियों ने मेरी शानदार विरासत छोड़ने में मदद की”

By | 19/06/2020

सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) एक ऐसे कप्तान थे जिन्होंने अपनी कप्तानी में टीम इंडिया को बहुत मजबूत किया। यह वही थे, जिन्होंने साल 2000 के आस-पास भारतीय टीम को खड़ा किया और यह उन्हीं का दौर था, जब भारतीय टीम ने न केवल सामने वाली टीम की आंखों में आंखे डालकर लड़ाई लड़ी बल्कि सौरव गांगुली ने अपने दौर में कई ऐसे खिलाड़ियों को मौका दिया, जिन्होंने भविष्य में लीजेंड का दर्जा हासिल किया। गांगुली ही वह शिल्पकार थे, जिसने वर्ल्ड चैंपियन बनने वाली टीम इंडिया को तराशना शुरू किया था। 2011 में भारतीय टीम जब वर्ल्ड कप जीती थी उस टीम का हिस्सा भले सौरभ गांगुली (Sourav Ganguly) न हों लेकिन इस जीत की बुनियाद उन्होंने ही रखी थी।

इन खिलाड़ियों का बढ़ाया हौसला….

2011 में भारतीय टीम जब वर्ल्ड कप जीती थी उस टीम का हिस्सा भले सौरभ गांगुली (Sourav Ganguly) नहीं थे लेकिन उस विजयी टीम में ज्यादातर ऐसे खिलाड़ी थे, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत गांगुली के ही नेतृत्व में की थी और यह गांगुली ही थे, जिन्होंने इन खिलाड़ियों को मैच विनर बनाने का हौसला दिया।अब सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने अपने उन पसंदीदा छह खिलाड़ियों का नाम लिया है, जिनकी पूर्व कप्तान ने हौसलाअफजाई की और उनका जमकर हौसला बढ़ाया।

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अनअकादमी के साथ एक ऑनलाइन सेशन में इस मुद्दे पर बात करते हुए सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने कहा कि “मैं अपने कप्तानी कार्यकाल से बहुत ही संतुष्ट हूं। साल 2011 वर्ल्ड कप टीम में साथ या आठ वह खिलाड़ी थे, जिन्होंने मेरी कप्तानी में खेलना शुरू किया। वीरेंद्र सहवाग, धोनी, युवराज, जहीर, हरभजन और नेहरा।”

गांगुली ने कहा “मैं सोचता हूं कि मैं इस बात से बहुत ही खुश हूं कि बतौर कप्तान ऐसी विरासत पीछे छोड़ी और यह मेरी सबसे बड़ी विरासत है।”

2011 में धोनी के वर्ल्ड कप जीतने की कामना की थी….

सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने इस सेशन के दौरान याद करते हुए कहा कि कैसे उन्होंने यह कामना की धोनी साल 2011 वर्ल्ड कप जीतें। उन्होंने बताया कि वह टीम का हिस्सा नहीं थे लेकिन अपने नेतृत्व में कभी खेले इन खिलाड़ियों को जीत की ट्रॉफी उठाने ये देखना चाहते थे।

पूर्व कप्तान ने कहा कि “साल 2011 वर्ल्ड कप के फाइनल में वह धोनी की टीम को श्रीलंका को हराते देखकर बहुत ही खुश थे। उन्होंने कहा मुझे याद है कि उस रात मैं वानखेड़े स्टेडियम में था और टीम को चक्कर लगाता देखने के लिए मैं कमेंट्री बॉक्स से उतरकर नीचे आया। साल 2003 में मैं जिस टीम का कप्तान था, वह फाइनल में हार गई थी। ऐसे में मैं एमएस धोनी को ट्रॉफी जीतकर देख बहुत ही खुश था।”

सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने इस बात पर भी खुशी जताई की, जिन खिलाड़ियों ने मेरे अंडर में डेब्यू किया उन्होंने विश्व कप जीतने के सपने को पूरा किया।

बता दें कि सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने 49 टेस्ट और 149 टेस्ट में कप्तानी की और इनमें उन्होंने क्रमश: 21 और 76 मैचों में जीत हासिल की। 2011 में धोनी की टीम में कुछ ऐसे खिलाड़ी थे, जो 2003 में जोहानिसबर्ग में फाइनल खेल चुके थे। सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar), वीरेंद्र सहवाग (Virender Sehwag), युवराज सिंह (Yuvraj Singh) , जहीर खान (Zaheer Khan), आशीष नेहरा (Ashish Nehra), और हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) उनमें से ही थे।

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