B’day Special- 1983 की टीम के वो गेंदबाज जिन्हें सर्वाधिक विकेट के बावजूद नहीं मिला श्रेय

By | 19/07/2020

1983 वर्ल्ड कप भारतीय इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज है। 1983 में भारत को विश्व चैंपियन बनाने का श्रेय सबसे ज्यादा वैसे तो तत्कालीन कप्तान कपिल देव (Kapil Dev) को दिया जाता है। लेकिन उस वर्ल्ड कप में एक ऐसा हीरो भी थे जिनको कभी ज्यादा श्रेय नहीं मिला लेकिन उन तेज गेंदबाज ने भारत के लिए पूरे टूर्नामेंट में सर्वाधिक 18 विकेट झटके थे। हम बात कर रहे हैं रोजर बिन्नी (Roger Binny) की। बिन्नी का आज 65वां जन्मदिन है और इस अवसर पर बीसीसीआई, विजडेन क्रिकेट और आईसीसी ने भी उनके रिकॉर्ड्स और फोटो के साथ उन्हें विश किया है। लेकिन हम आज चर्चा करेंगे उस सेमीफाइनल की जिसके बिना भारत 1983 के फाइनल में नहीं पहुंच सकता था और उसके हीरो रहे थे रोजर बिन्नी।

19 जुलाई 1955 को बेंगलूरू में जन्मे रोजर बिन्नी (Roger Binny) ने अपनी गेंदबाजी से 1983 वर्ल्ड कप में कमाल कर दिखाया था लेकिन बहुत कम ही लोगों को शायद उनकी उपलब्धि ज्ञात होगी। जब टूर्नामेंट के शुरू होने से पहले टीम इंडिया अपने सारे प्रेक्टिस मैच हार गयी थी और जब टीम का मनोबल बिल्कुल गिर चुका था। इसके बाद लीग स्टेज में मैच दर मैच बिन्नी (Roger Binny) ने अपने शानदार प्रदर्शन से टीम के लिए आखिरी तक सबसे ज्यादा 18 विकेट झटक लिए।

सेमीफाईनल के हीरो बिन्नी

अगर बिन्नी (Roger Binny) नहीं होते तो वर्ल्ड कप जीतना तो दूर भारतीय टीम फाइनल में भी नहीं पहुंच पाती। ऐसा हम इसलिए कहे रहे हैं क्योंकि वो बिन्नी ही थे जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में 8 ओवर में 29 रन देकर 4 विकेट लिए थे और ऑस्ट्रेलियाई टीम को धराशायी कर दिया था। भारत ने उस मैच में ऑस्ट्रेलिया को 60 ओवर में 247 रन बनाने का लक्ष्य दिया था पर बिन्नी की जबरदस्त गेंदबाजी की बदौलत ऑस्ट्रेलिया 129 रन पर ही सिमट कर रह गयी थी।

फाइनल में की किफायती गेंदबाजी

भारतीय टीम ने सेमीफाइनल तो आसानी से जीत लिया था लेकिन अब फाइनल में मुकाबला 2 बार की वर्ल्ड चैंपियन वेस्टइंडीज के साथ था। वेस्टइंडीज को हराना कोई हंसी का खेल नहीं था क्योंकि उस टीम में विवियन रिचर्ड्स के अलावा क्लाइव लॉयड , डेसमंड हेन्सऔर गॉर्डन ग्रीनीज जैसे दिग्गज खिलाड़ी भी मौजूद थे। पहले खेलते हुए भारतीय टीम 183 के लो स्कोर पर सिमट गई थी। उम्मीदें टूटने लगी थीं और किसी ने नहीं सोचा था कि इस दमदार बल्लेबाजी क्रम वाली वेस्टइंडीज 184 रन नहीं बना पाएगी।

मदन लाल और मोहिंदर अमरनाथ 3-3 विकेट लेकर इस जीत के हीरो रहे थे। लेकिन अक्सर कम स्कोर डिफेंड करते समय आपके फ्रंटलाइन गेंदबाज से आपको किफायती गेंदबाजी और शुरुआती विकेट की जरूरत होती है। और उन उम्मीदों पर बिल्कुल खरे उतरे अभी तक 17 विकेट झटकने वाले बिन्नी। उन्होंने ना सिर्फ किफायती गेंदबाजी की, इसके साथ ही 10 ओवर में 23 रन देकर एक विकेट भी लिया। भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण के सामने वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने पूरी तरह से घुटने टेक दिए और उनकी पूरी टीम 140 रन बनाकर ऑल आउट हो गयी और टीम इंडिया ने इतिहास रच दिया। इस जीत के साथ जहां एक तरफ कपिल देव रातों रात पूरे देश के हीरो बन गए, वहीं बिन्नी को कभी उनके शानदार प्रदर्शन का वो श्रेय नहीं मिला जो वो डिजर्व करते हैं।

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