B’day Special- एक ऐसा खिलाड़ी जिसे कहा जाता था गावस्कर की परछाई, फिर कैसे हुआ फ्लॉप!

By | 12/07/2020

भारतीय क्रिकेट इतिहास के कई ऐसे प्रतिभाशाली क्रिकेटर हुए हैं जो अपने क्रिकेट करियर में नाम नहीं कमा पाए ज्यादा लेकिन कमेंटेटर या कोच आदि के पद पर खासा सुर्खियां बटोरीं। उन्हीं में से एक नाम आता है संजय मांजरेकर (Sanjay Manjrekar) का। संजय मांजरेकर (Sanjay Manjrekar) आज अपना 55वां जन्मदिन मना रहे हैं। आपको सुनकर निश्चित ही ताज्जुब होगा कि करियर की शुरुआत में इस खिलाड़ी को तकनीक और पर्फेक्शन की वजह से दूसरा सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar) कहा जाता था। लेकिन आगे चलकर वे गावस्कर की उपाधि को छोड़िए खुद के नाम से भी एक क्रिकेटर के तौर पर ज्यादा मशहूर नहीं हो पाए। आईए उनके जन्मदिन के मौके पर जानते हैं कि आगे उनके करियर में आखिर ऐसा क्या हुआ था ?

हीरो से जीरो तक की कहानी…

दरअसल संजय मांजरेकर (Sanjay Manjrekar) ने भारतीय टीम में अपनी जगह बतौर विकेटकीपर/बल्लेबाज हासिल की थी। लेकिन आगे चलकर उन्होंने खुद को एक बल्लेबाज के तौर पर स्थापित किया। उन्होंने अपना डेब्यू टेस्ट मैच 1987 में वेस्टइंडीज के खिलाफ दिल्ली में खेला था। हालांकि पहले टेस्ट में मांजरेकर अपनी बल्लेबाजी से कोई कमाल नहीं कर पाए लेकिन अपनी तकनीक से हर किसी को जरूर हैरान कर दिया था।

संजय मांजरेकर (Sanjay Manjrekar) ने अपने टेस्ट करियर का पहला शतक 1989 में वेस्टइंडीज के खिलाफ ब्रिजटाउन टेस्ट में जमाया था। हालांकि यह टेस्ट मैच वेस्टइंडीज की टीम 8 विकेट से जीतने में सफल रही थी लेकिन मांजरेकर की बल्लेबाजी ने उनकी प्रतिभा का परिचय दे दिया था। उन्होंने 1987 से 1996 तक के करियर में 37 टेस्ट और 74 वनडे खेले। उन्होंने टेस्ट में 37.1 की औसत के साथ 4 शतक और 9 अर्द्धशतक की मदद से 2043 रन बनाए। वहीं वनडे में 33 से ऊपर की औसत से मांजरेकर ने अपने करियर में 1 शतक और 15 अर्द्धशतक की मदद से 1994 रन बनाए।

दो शानदार खिलाड़ियों के आगमन से धूमिल हुआ करियर…

सबकुछ ठीकठाक ही था और मांजरेकर (Sanjay Manjrekar) को धीरे-धीरे आने वाले समय का सुनील गावस्कर उनकी बैटिंग तकनीक और संयम के कारण कहा जाने लगा था। लेकिन 90 के दशक में ही सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ ने जैसे ही डेब्यू किया और शतक जड़ दिया मानों मांजरेकर (Sanjay Manjrekar) के करियर की चमक धूमिल होना शुरू हो गई। 1996 तरफ भारतीय क्रिकेट मैनेजमेंट की गेम प्लान और बेंच स्ट्रेंथ जैसी रणनीति मजबूत नहीं थी जिसके चलते मांजरेकर की जगह खतरे में पड़ गई। इसलिए संजय मांजरेकर ने जल्द ही बाहर होने के डर से संन्यास लेने का फैसला कर लिया। एक्सपर्ट्स की मानें तो वे आगे तीन-चार साल और क्रिकेट खेल सकते थे।

क्रिकेट पिच से कमेंटरी बॉक्स तक का सुनहरा सफर

क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद संजय मांजरेकर (Sanjay Manjrekar) ने वो करना शुरू किया जिससे उन्हें सबसे ज्यादा पहचान मिली। अपनी तकनीक और पर्फेक्शन के ज्ञान को मांजरेकर ने टीवी के माइक के जरिए इतना बखूबी दुनिया को समझाया कि आज उन्हें सर्वश्रेष्ठ कमेंटेटरों में से एक माना जाता है। वर्तमान में मांजरेकर (Sanjay Manjrekar) बेहतरीन क्रिकेट कमेंटेटेर हैं। मांजरेकर ने अपनी ऑटोबायोग्राफी भी लिखी है जिसका नाम “इम्परफेक्ट” है। इस ऑटोबायोग्राफी में मांजरेकर ने सचिन के साथ अपने रिश्ते और 1996 विश्व कप सेमीफाइनल में हार की भी चर्चा की है।

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