15 साल बाद सौरव गांगुली ने निकाली भड़ास, कहा सिर्फ चैपल नहीं थे जिम्मेदार!

By | 10/07/2020

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) अध्यक्ष सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) के करियर का सबसे बुरा दौर था साल 2005 से। गांगुली (Sourav Ganguly) का नाम टीम इंडिया के सबसे सफल कप्तानों में गिना जाता रहा है, लेकिन 2005 का साल उनके लिए काफी निराशाजनक रहा था। इस साल टीम को नया कोच मिला ग्रेग चैपल (Greg Chappel) के रूप में जिनकी सिफारिश खुद गांगुली (Sourav Ganguly) ने ही की थी। लेकिन चैपल ने गांगुली के पूरे करियर पर ही ग्रहण लगा दिया था। पहले गांगुली से कप्तानी छिनी और इसके बाद उन्हें टीम से भी बाहर कर दिया गया था। गांगुली (Sourav Ganguly) ने 15 साल बाद इस पर बात करते हुए कहा कि उन्हें टीम से निकालने में सिर्फ पूर्व कोच ग्रेग चैपल ही नहीं बल्कि पूरा सिस्टम शामिल था।

एक बंगाली न्यूजपेपर को दिए इंटरव्यू में गांगुली (Sourav Ganguly) ने अपने करियर के उस सबसे मुश्किल दौर के बारे में बातचीत करते हुए कहा कि, “वो मेरे करियर का सबसे बड़ा झटका था। मेरे साथ सरासर नाइंसाफी हुई थी। मुझे पता है कि आपको हमेशा न्याय नहीं मिल सकता, लेकिन फिर भी जो कुछ हुआ था मेरे साथ वो नहीं होना चाहिए था। मैं टीम इंडिया का कप्तान था और जिम्बाब्वे से जीतकर लौटा था और स्वदेश लौटते ही मुझे कप्तानी से हटा दिया गया था।”

2007 वर्ल्ड कप जीतना सपना था मेरा…

गांगुली (Sourav Ganguly) ने आगे कहा कि, ” मैंने 2007 वर्ल्ड कप भारत के लिए जीतने का सपना देखा था। इससे पहले हम फाइनल (2003 वर्ल्ड कप) में पहुंचे थे, मेरे पास यह सपना देखने के कारण थे। पांच सालों में टीम ने मेरी कप्तानी में अच्छा प्रदर्शन किया था, वो चाहे भारत में हो या फिर बाहर। इसके बाद आप अचानक मुझे टीम से ड्रॉप कर देते हैं? आप कहते हैं कि मैं वनडे इंटरनेशनल टीम का हिस्सा नहीं हूं और फिर मुझे टेस्ट टीम से भी बाहर कर दिया जाता है।”

सिर्फ चैपल नहीं थे इसके दोषी…

गांगुली (Sourav Ganguly) ने आगे ये भी कहा कि, “मैं सिर्फ ग्रेग चैपल को इसका दोषी नहीं ठहराऊंगा। इसमें कोई शक नहीं कि उन्होंने ही यह सब शुरू किया था। उन्होंने मेरे खिलाफ बोर्ड को एक ई-मेल लिखा, जो लीक हो गया। क्या ऐसा कुछ होता है? क्रिकेट टीम एक परिवार की तरह होती है। बाकी लोग भी निर्दोष नहीं थे। एक विदेशी कोच, जिसकी टीम सिलेक्शन में कोई नहीं राय मायने नहीं रखती थी, वो टीम इंडिया के कप्तान को ड्रॉप नहीं कर सकता। मुझे समझ में आ गया था यह बिना सिस्टम के सपोर्ट के नहीं हो सकता है। मुझे टीम से निकालने में सभी लोग शामिल थे, लेकिन मैं दबाव में बिखरा नहीं, मेरा आत्मविश्वास खत्म नहीं हुआ।”

गौरतलब है गांगुली (Sourav Ganguly) ने 2006 में दक्षिण अफ्रीकी दौरे के साथ टीम में वापसी की थी और अपने करियर के इन आखिरी दो सालों में कुछ यादगार पारियां भी खेलीं। उन्होंने 2008 में नागपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला था और रिटायरमेंट की घोषणा कर दी थी। गांगुली के करियर की बात करें तो उन्होंने 311 वनडे इंटरनेशनल मैचों में 11363 रन और 113 टेस्ट मैचों में 7212 रन बनाए। उनके खाते में 22 वनडे और 15 टेस्ट सेंचुरी शामिल हैं।

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