वर्ल्ड कप 1983 की विजेता भारतीय टीम के खिलाड़ी अब क्या कर रहे हैं?

By | 27/06/2020

1983 विश्व कप 25 जून का दिन, लॉर्ड्स का मैदान, बालकनी में काले कोट और चमचमाती ट्रॉफी के साथ भारतीय टीम। ये ऐसा लम्हा था जिसको ना आजतक शायद ही कोई भारतीय फैन भूल पाया होगा और ना ही भूल पाएगा। कैसे भूले भी आखिर उस विश्व कप में कुछ ऐसा हुआ था जिसकी शायद किसी को उम्मीद नहीं थी और अक्सर कहते हैं कि अगर बिना उम्मीद के कुछ अच्छा मिल जाए उसकी खुशी कई गुना ज्यादा होती है। ऐसा ही हुआ था 1983 के क्रिकेट विश्व कप में जहां शायद भारतीय टीम से किसी को शायद ये उम्मीद भी नहीं थी कि अंतिम चार में पहुंचेगी।

फिर 25 जून 1983 को लॉर्ड्स की बालकनी में वो ही भारतीय टीम विश्व कप ट्रॉफी के साथ जश्न मना रही थी। ऐसा पहली बार हुआ था तो खुशी भी अलग थी फिर उसके बाद अगले 28 साल यानी 2011 तक भारत को वनडे विश्व कप के लिए इंतजार करना पड़ा था। आज हम आपको बताएंगे उस ऐतिहासिक टीम के खिलाड़ियों के बारे में कि इस वक्त कौन खिलाड़ी कहां हैं और क्या कर रहे हैं।

वर्ल्ड कप 1983 की विजेता भारतीय टीम के खिलाड़ी अब क्या कर रहे हैं?

कपिल देव (कप्तान):

कपिल देव विश्व विजेता भारतीय टीम के कप्तान थे और विश्वकप में उनका प्रदर्शन बेहद शानदार रहा था। खासकर जिम्बाबे के खिलाफ खेली गई उनकी 175 रन की पारी आज भी वन डे की यादगार परियों में गिनी जाती है। आज कल वे अक्सर कमेंट्री बॉक्स या अलग-अलग चैनलों पर पैनलिस्ट के रूप में आते हैं। उनके ऊपर रणवीर सिंह द्वारा अभिनीत एक फिल्म भी आने जा रही है।

सुनील गावस्कर:

सुनील गावस्कर अपनी पीढ़ी के बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक थे। हालांकि विश्व कप में इस खिलाड़ी का बल्ला उतना नहीं चल पाया था। आजकल वे कमेंट्री करते हुए दिखते हैं।

कृष्णमाचारी श्रीकांत:

2008 में ये पूर्व दिग्गज खिलाड़ी, भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता नियुक्त किए जा चुके हैं। वह आईपीएल टीम सनराइजर्स हैदराबाद के संरक्षक के तौर पर काम करते रहे और उन्हें अपनी कमेंट्री के लिए काफी जाना जाता है। विश्व विजेता टीम में इनकी भूमिका ताबड़तोड़ बल्लेबाज की थी।

मोहिंदर अमरनाथ:

मोहिंदर अमरनाथ टीम के लिए हमेशा तुरुप का इक्का साबित हुए पूरे विश्व कप में और खासकर फाइनल मुकाबले में उन्होंने बल्ले और गेंद दोनों से अपना जलवा दिखाया। वह फाइनल मुकाबले में मैन ऑफ द मैच भी बने थे। आज के दौर में उन्हें अलग-अलग जगहों पर क्रिकेट विशेषज्ञ के तौर पर देखा जा सकता है।

रवि शास्त्री:

रवि शास्त्री उस भारतीय टीम के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडर में से एक थे। वहीं कुछ सालों पहले मशहूर कमेंटेटर बनने के बाद उन्होंने ये पद छोड़कर भारतीय क्रिकेट टीम के डायरेक्टर के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली और वर्तमान में वह भारतीय टीम के मुख्य कोच हैं।

यशपाल शर्मा:

यशपाल शर्मा भी उस विश्व विजेता टीम का हिस्सा थे। खेल से रिटायर होने के बाद, यशपाल कुछ दिनों तक अंपायरिग करते दिखे और बाद में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय टीम के चयनकर्ता की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। वर्तमान में आप उन्हें कई चैनलों पर क्रिकेट विशेषज्ञ के तौर पर भी देख सकते हैं।

बलविंदर संधू:

बलविंदर संधू विश्व कप में भारतीय टीम के स्पिन गेंदबाज थे। रिटायर होने के बाद संधू ने मुंबई और पंजाब के कोच के रूप में काम किया और फिलहाल वह मुंबई में अपने परिवार के साथ एक शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे हैं । उन्हें बहुत कम कहीं किसी शो पर देखा जाता है।

दिलीप वेंगसरकर:

दिलीप वेंगसरकर विश्व कप टीम के वो सदस्य थे जिन्हें सिर्फ दो मुकाबले खेलने का मौका मिला था। बाद में इन्हें चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में भी देखा गया। आज, वह तीन क्रिकेट अकादमी चलाते हैं और उन्होंने कुछ वक्त पहले अपनी वेबसाइट भी शुरू की थी।

रोजर बिन्नी:

रोजर बिन्नी के लिए विश्वकप 1983 शानदार रहा था और वे विश्व कप में भारत के सबसे सफल गेंदबाज थे। उन्होंने 3.82 के इकॉनमी के साथ कुल 18 विकेट लिए थे और बल्ले से भी उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में कुल 73 रन का योगदान दिया था। 2012 में उन्हें राष्ट्रीय चयनकर्ता के रूप में नियुक्त किया गया था और अभी भी वह कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े हुए हैं।

संदीप पाटिल:

संदीप पाटिल विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के प्रमुख सदस्य थे। रिटायरमेंट के बाद वे केन्या के लिए 2003 के विश्वकप के दौरान कोच थे और उनके परीक्षण में टीम सेमीफाइनल तक पहुंची थी। इसके बाद वे बीसीसीआई के चयनकर्ता भी बने।

मदन लाल:

विश्व विजेता टीम के अन्य प्रमुख सदस्य मदन लाल संन्यास लेने के बाद दिल्ली के सिरी फोर्ट स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में क्रिकेट अकादमी चलाते हैं। पूर्व दिग्गज खिलाड़ी को कई चैनलों पर क्रिकेट विशेषज्ञ के तौर पर देखा जा सकता है।

कीर्ति अजाद:

कीर्ति अजाद के प्रदर्शन ने किसी को ज्यादा प्रभावित नहीं किया था। वह पूरे टूर्नामेंट में तीन मैचों में सिर्फ 15 रन ही जोड़ पाए थे। संन्यास के बाद वे एक सफल राजनीतिज्ञ बनकर उभरे और वो इस समय भी राजनीति में सक्रिय हैं।

सैयद किरमानी:

सैयद किरमानी विश्वकप टीम में भारत के विकेटकीपर बल्लेबाज थे.। रिटायर होने के बाद उन्होंने बॉलीवुड में अपनी किस्मत आजमाई और वह कुछ फिल्मों का हिस्सा भी बने। इसके बाद आज उन्हें कभी-कभी किसी शो में पैनलिस्ट के तौर पर देखा जा सकता है।

सुनील वालसन:

1983 के विश्व कप के दौरान सुनील वालसन भारतीय क्रिकेट टीम के ऐसे सदस्य थे जिन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला था। फिलहाल आजकल वे इंडियन प्रीमियर लीग के दिल्ली डेयरडेविल्स के साथ जुड़े हुए हैं।

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