चेतन चौहान ने किस प्रकार मैदान पर बहादुरी और बाहर विनम्रता का परिचय दिया :- जानिए उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें

By | 17/08/2020

चेतन चौहान (Chetan Chauhan) भले ही इस दुनियां से चले गए हो लेकिन उन्होने क्रिकेट प्रेमियों के दिल मे अपनी एक गहरी छाप छोड़ी है। और वह छाप हमेशा अमिट रहेगी मैदान पर बहादुरी तो मैदान के बारह बढ़ी सादगी वक परिचय दिया है उनकी इस विनम्रता के लिए हमेशा याद किया जाएगा।
1977 में सिडनी टेस्ट में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया (Australia) के तेज गेंदबाज ज्योफ थाॅमसन ( Jyof Thomson) का बड़ी बहादुरी से सामना किया था। वह क्रिकेटर से राजनेता भले हो गए थे, लेकिन क्रिकेट उनके दिल से कभी नहीं निकला। चाहे लोकसभा का गलियारा हो या फिर फिरोजशाह कोटला में उनके केबिन में बात क्रिकेट की ही होती थी।

मैदान पर लंबा समय गुजारने के बाद भी चेतन चौहान (Chetan Chauhan) चयनकर्ता, प्रशासक और मैनेजर के रूप में खेल से जुड़े रहे। डीडीसीए में वह उच्च पदों पर रहे।

सुनील गावस्कर और चेतन चौहान की है दूसरी सर्वश्रेष्ठ जोड़ी :-

भारतीय टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar) और चेतन (Chetan) की ओपनिंग जोड़ी दूसरी सर्वश्रेष्ठ जोड़ी है। दोनों ने 59 पारियों में 53.75 की औसत से 3010 रन जोड़े। इनमें 1979 के ऐतिहासिक ओवल टेस्ट में निभाई गई 213 रनों की साझेदारी भी है। यह साझेदारी 438 रनों के रिकॉर्ड लक्ष्य का पीछा करते हुए की गई थी।

चेतन चौहान को टेस्ट में एक भी सतक नही जड़ पाने का रहा मलाल :-

चेतन चौहान (Chetan Chauhan) के नाम एक अनचाहा रिकॉर्ड रहा उन्होंने 40 टेस्ट मैच खेले जिसमे उन्होंने 2000 से अधिक रन बनाए परन्तु वह एक भी सतक नही बना सके इसके उनको हमेशा मलाल रहता था। 1981 में एडिलेड टेस्ट में 97 पर आउट होकर महज तीन रन से चूक गए थे। मंकी गेट के लिए प्रसिद्ध 2007 के विवादित ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर भी चौहान भारतीय टीम के मैनेजर थे। उस दौरान भी वह टीम के साथ अडिग खड़े हो गए थे।

ज्योफ थॉमसन के बाउंसर पर नही झुके :- सुनील गावस्कर

चौहान किस कदर दिलेर थे इसका उदाहरण एक बार गावस्कर ने कोटला में दिया था। उन्होंने बताया था कि 1977 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी टेस्ट में वह और चौहान जिन्हें हम प्यार से मास्टर कहकर पुकारते थे बल्लेबाजी कर रहे थे। उस समय ज्योफ थाॅमसन (Jyof Thomson) को दुनिया का सबसे तेज गेंदबाज माना जाता था।
थाॅमसन की एक गेंद को चौहान ने स्लैश किया और गेंद बाउंड्री पार चली गई। पवेलियन में बैठे सभी खिलाड़ी मास्टर कहकर चिल्लाने लगे। उन्हें देखकर चौहान भी हंसे। उनकी थाॅमसन से निगाह मिल गई। फिर क्या था थाॅमसन आग बबूला हो गए और उनका सिर फोड़ने की बात कही।
गावस्कर ने चौहान को समझाया कि कभी पेसर को गुस्सा मत दिलाना। तो चौहान बोले वह भी राजपूत हैं उससे नहीं डरते। इसके बाद थाॅमसन ने तेज और खतरनाक गेंदबाजी चौहान को की, लेकिन वह उनकी गेंदों को झेलते गए और उफ तक नहीं किया। जब 127 गेंद खेलकर 42 रन बनाने के बाद चौहान आउट हुए तो उन्हें अस्पताल जाना पड़ा। वहां उनके अंगूठे में फ्रैक्चर निकला।

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