राहुल द्रविड़ ने कर दिया था सचिन और गांगुली को 2007 का वर्ल्डकप खेलने से मना : लालचंद राजपूत

By | 29/06/2020

2007 में t20 वर्ल्ड कप जीतना भारत के लिए गर्व की बात थी। एम एस धोनी (MS Dhoni) की अगुवाई में जीते गए इस वर्ल्ड कप के बाद जहां अनेक लोगों ने टीम इंडिया को सराहा , बधाइयां दी वहीं दूसरी तरफ सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar), राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) और सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) जैसे दिग्गजों को ना खेलते देख पाने के लिए लोगों ने सवाल भी खड़े किए थे। फिलहाल में उस वक्त टीम इंडिया के मैनेजर रहे लालचन्द राजपूत (Lalchand raajput) ने एक बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि राहुल द्रविड़ ने तेंदुलकर और गांगुली को वह वर्ल्ड कप खेलने से रोका था।

राहुल द्रविड़ टीम में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखते थे और यह भी संभावनाएं थी कि वह इस टीम को उस वक्त लीड करें। लेकिन उन्होंने न सिर्फ खुद को भी इस टूर्नामेंट से अलग किया बल्कि अपने साथ अन्य दिग्गज खिलाड़ियों को भी यह टूर्नामेंट न खेलने के लिए कहा। उस वक्त तक यह बात सिर्फ अफवाह के रूप में थी लेकिन लालचंद राजपूत ने अब यह बात कन्फर्म की है।

लालचंद ने बताया है कि “राहुल द्रविड़ इंग्लैंड में उस वक्त टीम के कप्तान थे और कुछ खिलाड़ी इंग्लैंड से सीधे जोन्सबर्ग (Johnnesberg) आए थे। इस बात पर उन्होंने कहा कि नए और युवा खिलाड़ियों को हमें मौका देना चाहिए और उन्होंने ऐसा ही किया था। कि बाद में जब युवा टीम ही उस वर्ल्ड कप को जीती तो उन्हें इस बात का अफसोस भी हुआ होगा। तेंदुलकर और गांगुली को खेलने के लिए भी उन्होंने ही मना किया था।”

“धोनी हमेशा खिलाड़ियों को सकारात्मक रहने के लिए कहते थे। ड्रेसिंग रूम में भी उन्होंने खिलाड़ियों को इसी संदेश के तहत तैयारी कराई थी कि ‘टेंशन लेने का नहीं, देने का’ और इस तरीके से खिलाड़ियों का साहस बढ़ा। वह जानते थे कि यह एक ऐसी टीम है जो इस बार हमें वर्ल्ड कप जिता सकती है और ऐसा हुआ भी।” आगे बात करते हुए लालचंद ने बताया।

इस मामले में जब लालचंद से थोड़ी और बातचीत हुई तो उन्होंने यह भी कहा कि धोनी को जहां एक तरफ पूरा विश्वास था कि यह टीम वर्ल्ड कप जिताने में सफल हो सकती है वहीं द्रविड़ को यह विश्वास नहीं था ।उनका मानना था कि टीम में बहुत सारे नए और युवा खिलाड़ी हैं। धोनी ने इस कमजोरी को ताकत बनाया।

जब लालचंद टीम के मैनेजर थे तो उस वक्त उनकी सचिन से बात हुई थी और उन्होंने अपनी इस बातचीत के बारे में बताया है कि सचिन इस वर्ल्ड कप को पाने के लिए जी जान लगा देना चाहते थे। वह एक भी वर्ल्ड कप तब तक नहीं जीते थे। उसके बाद नए खिलाड़ियों को मौका दिया गया तो उन्होंने पहली ही बार में वर्ल्ड कप जीतने का कमाल कर दिखाया।

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