“दादा” के फुटबॉलर से क्रिकेटर बनने की कहानी…..

By | 01/06/2020

क्रिकेट जगत के महान खिलाड़ी और भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे आक्रामक कप्तान सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) कठिन से कठिन समय में टीम की कमान संभालने के लिए जाने जाते हैं। विकट परिस्थितियों में ‘दादा’ की कप्तानी और उनका प्रदर्शन दोनों निखर कर सामने आते थे।

गांगुली (Ganguly) के रौद्र रुप से तो सभी वाकिफ है, सामने वाली टीम के छक्के छुड़ाने में उनका यहीं आक्रामक रुप काम आता था। गांगुली(Ganguly) बचपन से ही इसी स्वभाव के थे जिसके चलते उनको पसंदीदा खेल को छोड़कर क्रिकेट (Cricket) को चुनना पड़ा।

जी हां सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने अपने फैंन्स से अपने करियर के कुछ अनजाने पहलुओं पर बात की जिनका खुलासा अभी तक उन्होंने नहीं किया था। एक लाइव सेशन के दौरान सौरव गांगुली (Sourav Ganguly)ने अपनी बचपन की यादों को फैंन्स के साथ साझा किया। ‘दादा’ ने बताया कि किस तरह वह बचपन में एक फुटबॉलर (Footballer) बनना चाहते थे लेकिन अंत में क्रिकेट (Cricket) को उन्हें चुनना पड़ा।

फुटबॉलर बनना चाहता था…..

फुटबॉल खेलते हुए सौरव गांगुली

सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने कहा “मैं फुटबॉल (Football) को गंभीरता से ले रहा था और इसी को अपना प्रोफेशन बनाना चाहता था। फुटबॉल मेरी जिंदगी थी और 9वीं कक्षा तक मैं इसे काफी सीरियस होकर खेलता था, लेकिन मेरे शरारती स्वभाव ने सारा खेल बिगाड़ दिया। मेरी शरारात के चलते मेरे पिता जी ने मुझे क्रिकेट कोचिंग अकादमी में डाल दिया। बस पिता जी के इस फैसले के बाद मैं भी पीछे मुड़कर फुटबॉल (Football) को नहीं देख पाया और क्रिकेटर(Cricketer) बन गया।”

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दादा ने आगे बताया “मेरे पिता जी बहुुत अनुशासन वाले वाले व्यक्ति थे और मैं उतना ही शरारती इसी लिए पिता जी ने क्रिकेट अकादमी में मुझे डाला। सिर्फ पिता जी ही नहीं मेरे कोच (Coach)ने भी मुझे फुटबॉल छोड़ने की सलाह दी। दरअसल मैं क्रिकेट कोचिंग के बाद भी फुटबॉल खेलता था। आखिरकार मेरे कोच ने मुझे फुटबॉल से दूरी बनाने को कहा और मैं क्रिकेटर बन गया।”

करियर के यादगार लम्हे….

इस खुलासे के साथ-साथ ‘दादा’ ने इस लाइव में अपने करियर के उन लम्हों की भी बात की जो उनके लिए बेस्ट थे। अपने डेब्यू मैच में शतक लगाने वाले गांगुली (Ganguly) ने बताया मैंने दलीप ट्रॉफी (Duleep Trophy) के अपने पदार्पण मैच में शतक लगाया और बंगाल के लिए रणजी फाइनल (Ranji Trophy) में पदार्पण किया लेकिन टेस्ट डेब्यू में लॉर्ड्स में शतकीय पारी खेलना मेरे लिए किसी सपने की तरह था।

आपको बता दें कि क्रिकेट फैंन्स और क्रिकेट जगत में “दादा” के नाम से मशहूर सौरव गांगुली (Sourav Ganguly)अपने डेब्यू मैच में ही शतक लगाकर अपने करियर की शानदार शुरुआत की थी। साल 2000 में खराब स्वास्थ्य के चलते सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने कप्तानी त्याग दी जिसके बाद सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) को टीम की कप्तानी सौपी गई।

2002 में नेटवेस्ट सीरीज जीतने के बाद सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने लॉर्ड्स की बालकनी में अपनी शर्ट निकालकर लहराई थी। गांगुली (Ganguly) के इस बर्ताव के लिए उनकी काफी आलोचना भी हुई लेकिन भारतीय इतिहास में यह एक गोल्डन मूवमेंट बन गया। साल 2003 में सौरव गांगुली के नेतृत्व में टीम इंडिया (Team India) विश्व कप (World Cup 2003) फाइनल तक गई।

लॉर्ड्स की बालकनी में टीशर्ट उतारकर लहराते सौरव गांगुली

2003 में टीम इंडिया (Team India) को फाइनल तक पहुंचाने वाले ‘महाराज’ ने 2008 में हमेशा-हमेशा के लिए क्रिकेट को अलविदा कह दिया। 2008 में सौरव गांगुली ने क्रिकेट जगत से संन्यास का ऐलान कर दिया और इसके साथ उन्होंने टीम इंडिया(Team India) की कमान युवाओं के हाथों में सौप दी। संन्यास लेने के बाद दादा ने इंडियन प्रीमियम लीग (IPL) में कोलकाता नाइटराइडर्स (KKR) फिर सहारा पुणे वॉरियर्स की कमान भी संभाली।

इसके बाद सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने बल्ला तो नहीं थामा लेकिन क्रिकेट से हमेसा जुड़े रहे। “दादा”ने बतौर कमेंटेटर भी काम किया और मौजूदा समय में वह बीसीसीआई (BCCI) के अध्यक्ष पद पर कार्यरत हैं और अध्यक्ष का कार्य बखूबी संभाल रहे हैं

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